पूर्ण जग एकीकडे राहिले आहे सर्व अंधुक दिसतय
पन रोज माझ मन तिच्या मेसेज चीच वाट बघतय।
kavinandan
भरी मेहफिलों मे छुपा लेते है
की हम भी प्यार मे पागल है ...
ओर हमे देखके लोग कहते है
ये इंसान जरुर किसी दर्द से घायल है...
कवीनंदन जी
उनकी वो कोमल सी आवाज सुने सदिया बित गयी है।
पर आज भी उनके वो तीन शब्द कानोंमे गूंजते है।
कवीनंदन जी
हमने तो दिल भी चिर दिया
जब लिखा उसपे तेरा नाम ...
पर तु क्यों पत्थर बन गया
क्या यही है सच्चे प्यार का इनाम...
कवीनन्दन जी
यु तो तेरे इश्क मे
मे घायल तो जरुर है
पर तु अभी भी मेरी है
इसका आज भी गुरुर है
कवीनन्दन जी
तम्मना ना रख ये दोस्त
चाह कर किसिको पाने की।।
उम्मीद ना रख कभी
गए हुये वापिस आने की ।।
कवीनन्दन जी
वो प्यार के पढ़ाई
पूरी ना कर सके।।
काश इसमे भी
एटिकेटी सिस्टिम होती
कवीनंदन जी
Dil ko sambhalna sikhle ye dost
Kai log khilone dhundte rehte hai
Kavinandan ji
उनकी वो कोमल सी आवाज सुने सदिया बित गयी है।
पर आज भी उनके वो तीन शब्द कानोंमे गूंजते है।
पन रोज माझ मन तिच्या मेसेज चीच वाट बघतय।
kavinandan
भरी मेहफिलों मे छुपा लेते है
की हम भी प्यार मे पागल है ...
ओर हमे देखके लोग कहते है
ये इंसान जरुर किसी दर्द से घायल है...
कवीनंदन जी
उनकी वो कोमल सी आवाज सुने सदिया बित गयी है।
पर आज भी उनके वो तीन शब्द कानोंमे गूंजते है।
कवीनंदन जी
हमने तो दिल भी चिर दिया
जब लिखा उसपे तेरा नाम ...
पर तु क्यों पत्थर बन गया
क्या यही है सच्चे प्यार का इनाम...
कवीनन्दन जी
यु तो तेरे इश्क मे
मे घायल तो जरुर है
पर तु अभी भी मेरी है
इसका आज भी गुरुर है
कवीनन्दन जी
तम्मना ना रख ये दोस्त
चाह कर किसिको पाने की।।
उम्मीद ना रख कभी
गए हुये वापिस आने की ।।
कवीनन्दन जी
वो प्यार के पढ़ाई
पूरी ना कर सके।।
काश इसमे भी
एटिकेटी सिस्टिम होती
कवीनंदन जी
Dil ko sambhalna sikhle ye dost
Kai log khilone dhundte rehte hai
Kavinandan ji
उनकी वो कोमल सी आवाज सुने सदिया बित गयी है।
पर आज भी उनके वो तीन शब्द कानोंमे गूंजते है।
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